Welcome to KHABARO KI NIGRANI
Click to listen highlighted text!
Welcome to KHABARO KI NIGRANI
भितरवार। नगर भितरवार के पुराना बाजार स्थित पारसनाथ दिगंबर जिनालय में रविवार की सुबह तीन दिवसीय श्री 1008 रत्नत्रय विधान पाठ की शुरुआत मंत्रोंच्चारण के साथ रत्नत्रय की स्थापना और ध्वजा पूजन के साथ की गई यह विधान पाठ 17 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
भितरवार नगर के प्रतिष्ठित व्यवसाई सिंघई विनोद कुमार ऋषभ कुमार जैन एवं समस्त सिंघई परिवार के सहयोग से शुरू किए गए श्री 1008 रत्नत्रय विधान पाठ के पाठ कर्ता जैन पं. राजेंद्र प्रसाद जी शास्त्री के मार्गदर्शन में त्रियदिवसीय विधान में पहले दिन रविवार को सम्यगदर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यकचारित्र की महिमा को बताया गया। तो वहीं उपस्थित जैन समुदाय के श्रद्धालु भक्तों के द्वारा भगवान को अर्घ्य समर्पित किए गए। इस दौरान उन्होंने रत्नत्रय की महिमा बताते हुए कहा कि मोक्ष मार्ग की सफलता का सोपान होता है, जिसमें जैन समाज के समस्त मुनी- आर्यिका, ऐलक-छुल्लक रत्नत्रय धारी होते हैं। व्रत करने का फल तभी प्राप्त होता है जब श्रावक- श्राविका इसको करते वक्त अपनी संपूर्ण दिनचर्या, आत्मचिंतन, सामायिक, धर्म- ध्यान, पूजन आदि में व्यतीत करें। साथ ही बताया कि आत्मा से कर्मों को अलग करने का नाम धर्म है। धर्म के नाम पर अलग होना अधर्म है। धर्म अलग-अलग नहीं करता, बल्कि अलग-अलग परिवारों को गले लगाना सिखाता है। जहां व्यक्ति, समाज और देश के अलग-अलग होने की बात आती है वहां धर्म का गला घुट जाता है। संप्रदाय का नाम धर्म नहीं, क्योंकि धर्म जोड़ता है और संप्रदाय तोड़ता है। आज विश्व में धर्म कम संप्रदाय ज्यादा है। साथ ही बताया कि अभिव्यक्ति और अनुभूति में जमीन आसमान का अंतर है। आओ व्यक्ति तो कोई भी व्यक्ति ग्रंथ पढ़कर सकता है, लेकिन अनुभूति तो अंगीकार कर जीवन में रत्नत्रय ओ अंगीकार करके की जा सकती है। धर्म आत्म दर्शन की वस्तु है और ऐसा मानने वाले व्यक्ति कर्तव्य समझकर धार्मिक क्रियाएं करते हैं। वहीं रविवार को पहले दिन प्रातः कालीन बेला में श्री 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रत्नत्रय विधान पाठ की शुरुआत के लिए सर्वप्रथम देव आव्हान, गुरु आव्हान और घट यात्रा, ध्वजारोहण करते हुए मंडप शुद्धि ,इंद्र प्रतिष्ठा, अभिषेक ,शांति धारा और नित्यमह पूजन किया गया। जिसमें जल, चंदन, अक्षत, फूल, नैवेद्य, धूप – दीप, फल और अर्घ्य के साथ अष्ट द्रव्यों के बीच जयमाला पढी गई। इस दौरान सौरभ एंड पार्टी मुरैना के द्वारा संगीत की स्वर लहरियों के बीच सभी उपस्थित जैन समुदाय के श्रद्धालु भक्त महिला पुरुषों को भक्ति भाव में शरा वोर करते हुए रत्नत्रय विधान पाठ के मंत्रों से पूजन कराया गया। इस अवसर पर संपूर्ण सिंघई परिवार के साथ ही नगर के अन्य जैन धर्मालंबी श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे।
Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!