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जीवन को मुक्ति दिलाना है तो भगवान की वस्तुओ को भगवान को ही करें समर्पित -कथा व्यास सुशील पुरोहित

कुशवाहा क्षत्रिय समाज की कथा में चतुर्थ दिवस कृष्ण जन्म की कथा का हुआ वर्णन

भितरवार। नगर के वार्ड क्रमांक 13 बैकुंठ धाम मंदिर प्रांगण पर कुशवाहा क्षत्रिय समाज द्वारा आयोजित कराई जा रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस शनिवार को कथा समापन से पूर्व कथा व्यास पंडित सुशील पुरोहित जी ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म की रोचक कथा का वर्णन सुनाया जिसे सुनकर श्रोता नाचने- गाने के साथ ईश्वरीय भक्ति में अविरल होकर झूमने लगे। उससे पूर्व उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म पर विपदा आती है तो उस विपदा को दूर करने के लिए तब-तब भगवान का अवतार होता है। वहीं उन्होंने पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के दो भक्त जय और विजय के शापित होकर हाथी व मगरमच्छ के रूप में धरती पर उत्पन्न हुए, गंडक नदी में एक दिन कौनहारा के तट पर जब हाथी पानी पीने आया तो मगरमच्छ ने उसे पकड़ लिया। फिर हाथी मगरमच्छ से छुटकारा पाने के लिए कई वर्षों तक लड़ता रहा। इसके बाद उन्होंने वामन अवतार के प्रसंग में बताया कि हमारे पास जो कुछ है वह सब भगवान का ही है। भगवान की वस्तुओं को भगवान को समर्पित करके ही जीवन की मुक्ति को प्राप्त किया जा सकता है। जिस प्रकार महाराज बलि ने भगवान बामन को सब कुछ समर्पित कर भगवान को ही प्राप्त कर लिया था। इसी प्रकार उन्होंने भगवान राम के जन्म की कथा का संक्षिप्त वर्णन बताते हुए कहा की भगवान राम ने मानवता की स्थापना तथा राक्षस जाति की समाप्ति के लिए धरती पर जन्म लिया था। इतना ही नहीं भगवान राम के अंदर वह सारे गुण थे। जिससे उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है। भगवान राम वह आदर्श पुरुष थे जिनको 14 वर्ष का वनवास मिला। उसके बावजूद भी वह अपना राज्य सिंहासन त्याग कर अपने पिता की आज्ञा का पालन किया। भाई के प्रति कैसे व्यवहार करना है। ऋषि- मुनियों से कैसे व्यवहार करना है। मित्रता कैसे निभानी है। इसी वजह से भगवान राम को एक आदर्श पुरुष का दर्जा भी दिया गया है। वही “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल से गूंजा कथा पंडाल। यह अवसर था कथा में कृष्ण जन्म की कथा का जब कथा व्यास सुशील पुरोहित ने वर्णन सुनाते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी लोक पर अत्याचार, अनाचार व अन्याय बढा है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। अत्याचार को समाप्त कर धर्म की स्थापना को लेकर ही प्रभु का अलग-अलग रूपों में अवतार हुआ है। जब कंस ने अपनी अत्याचार की सभी मर्यादाएं तोड दी, तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कथा के दौरान बासुदेव, यशोदा व श्रीकृष्ण के बाल-रूप की झांकी देख सभी श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए नृत्य करने लगे। प्रवचन के क्रम में कथावाचक ने कहा कि जीवन में अच्छे रास्ते पर जाना है, तो संकल्प लेना जरूरी है।हर बच्चे को अपने माता-पिता व गुरू की बातों को मानना चाहिए। जिन बच्चों के ऊपर माता-पिता का आशीर्वाद है, उन्हें संसार में सब कुछ प्राप्त है। हर एक माता-पिता को चाहिए कि अपने साथ बच्चों को भागवत कथा, सत्संग, कीर्तन में जरूर साथ लाएं।धर्म की कथा सुनने से बच्चों में अच्छे संस्कार आते है। इस दौरान व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को खेल- खिलौने, टॉफी सहित तमाम वस्तुओं का वितरण किया गया। वही श्रद्धालु भक्तों ने भी भगवान कृष्ण के जन्म के अवसर पर जमकर नृत्य करते हुए भगवान कृष्ण की जय जयकार की।

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