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ग्वालियर।
कभी लोगों के बीच “राजवीर” के नाम से पहचान रखने वाले बंसीवीर आज अपनी जिंदगी को नए तरीके से संभाल रहे हैं। समय के बदलते हालात और परिस्थितियों ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी है। अब वही राजवीर सड़कों और बाजारों में बंसी का मसाला बेचकर अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे हैं।
बताया जाता है कि एक समय ऐसा भी था जब राजवीर को लोग “बंसीवीर” के नाम से जानते थे। यह नाम उनकी पहचान बन चुका था, लेकिन वक्त के साथ हालात बदलते चले गए। आर्थिक परिस्थितियों और जिम्मेदारियों ने उन्हें मजबूर किया कि वे कोई छोटा-बड़ा काम करने में संकोच न करें।
आज राजवीर शहर के अलग-अलग इलाकों में घूम-घूमकर बंसी का मसाला बेचते नजर आते हैं। वे खुद हरि पत्तियों को लेकर मसाला तैयार करते हैं और लोगों को उसका स्वाद चखाकर खरीदने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी मेहनत और ईमानदारी ही अब उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
राजवीर का मानना है। कि काम छोटा-बड़ा नहीं होता, मेहनत से कमाया गया हर पैसा सम्मान देता है। इसी सोच के साथ वे रोज सुबह निकलते हैं और देर शाम तक मसाला बेचकर परिवार की जरूरतें पूरी करने की कोशिश करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजवीर की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो परिस्थितियों से हार मान लेते हैं। कठिन हालात के बावजूद उन्होंने मेहनत का रास्ता चुना और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का फैसला किया।
राजवीर की यह संघर्ष गाथा बताती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, मेहनत और हिम्मत के सहारे जिंदगी को फिर से खड़ा किया जा सकता है। राजवीर से बंसी का मसाला जो व्यक्ति एक बार खरीद लेता है। उस बंसी के मसाले को खरीदने के लिए राजीवर के घर तक कई लोग पहुंचते है। इतना ही नहीं हरि पट्टी के मसाले को बेचने के लिए घर के बाहर लड़के भी खड़े कर रखे है। जिससे मसाले खरीदने आने वाले लोगों को परेशान ना होना पड़े ।
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