मंडी बोर्ड के पुरुषोत्तम का निर्णय न सिर्फ नियमों के विपरीत, विभाग की साख पर भी खड़े हो रहे सवाल
फर्जी जाति प्रमाण पत्र की जांच की जगह आयुक्त ने दिया प्रमोशन, मंडी बोर्ड में मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड में नियमों को ताक पर रखकर प्रमोशन देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दरअसल, मंडी बोर्ड में कार्यरत अधिकारी मीणा के फर्जी जाति प्रमाण पत्र को लेकर पहले से शिकायत लंबित थी, जिसकी जांच कराना आयुक्त की जिम्मेदारी थी। लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही आयुक्त पुरुषोत्तम ने न सिर्फ शिकायत को नजरअंदाज किया बल्कि मीणा को पदोन्नति भी दे दी।
इस कदम के बाद मंडी बोर्ड कार्यालयों में हड़कंप मच गया है। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय यह है कि जब किसी कर्मचारी पर जाति प्रमाण पत्र से संबंधित शिकायत लंबित हो, तो जांच पूरी हुए बिना उसे प्रमोशन कैसे दिया जा सकता है?
सूत्रों के मुताबिक, मीणा के जाति प्रमाण पत्र को लेकर पहले मंडी बोर्ड भोपाल कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में प्रमाण पत्र की सत्यता पर सवाल उठाए गए थे और जांच की मांग की गई थी। लेकिन आयुक्त पुरुषोत्तम ने कथित तौर पर इस प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे प्रमोशन आदेश जारी कर दिए।
मंडी बोर्ड के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आयुक्त की इस कार्यशैली को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। कई वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि यह निर्णय न सिर्फ नियमों के विपरीत है, बल्कि विभाग की साख पर भी सवाल खड़ा करता है।
मामले को लेकर अब कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि क्या शिकायत को दबाने के पीछे कोई दबाव या पक्षपात की भूमिका रही? वहीं यह भी कहा जा रहा है कि यदि प्रमोशन आदेश वापस नहीं लिए गए तो यह मामला शासन स्तर तक पहुंच सकता है।
गौरतलब है कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर प्रमोशन देना मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 और आरक्षण नियम 1994 का उल्लंघन माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जांच लंबित रहते हुए किसी भी अधिकारी को प्रमोशन देना प्रशासनिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
मंडी बोर्ड में इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कर्मचारी संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब देखना होगा कि शासन स्तर से इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई होती है।



