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शैलेन्द्र तिवारी
ग्वालियर, 3 मार्च 2026 । आर्थिक तंगी और शारीरिक लाचारी जब इंसान को चारों ओर से घेर लेती है, तो उम्मीद की एक किरण ही काफी होती है। कुछ ऐसा ही हुआ आदिवासी मरीज महेश के साथ, जिसके लिए गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने सार्थक पहल की।
महेश ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि कुछ समय पहले मजदूरी के दौरान उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया था। गरीबी के कारण जैसे-तैसे प्लास्टर तो लगवाया, लेकिन हड्डी सही से सेट नहीं हुई और हाथ टेढ़ा जुड़ गया। परिणाम यह हुआ कि वह अब मजदूरी करने में भी असमर्थ है। परिवार में वह अकेला कमाने वाला है और उसके दो मासूम बच्चों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा था।
डीन की संवेदनशीलता: तत्काल भर्ती के निर्देश
जब महेश अपनी परेशानी लेकर डीन डॉ. धाकड़ के पास पहुंचा, तो डीन ने सबसे पहले उससे आयुष्मान कार्ड के बारे में पूछा। महेश के पास कार्ड न होने की जानकारी मिलते ही डॉ. धाकड़ ने संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने तत्काल ऑर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. आर.एस. बाजौरिया को फोन लगाया और निर्देश दिए कि मरीज का प्राथमिकता के आधार पर आयुष्मान कार्ड बनवाया जाए। उसे तुरंत वार्ड में भर्ती किया जाए।
यह ली जिम्मेदारी
डॉ. धाकड़ ने न केवल इलाज के निर्देश दिए, बल्कि यह जिम्मेदारी भी ली कि वे खुद महेश के हाथ का ऑपरेशन करेंगे। इस मानवीय पहल की अस्पताल परिसर में काफी चर्चा है, क्योंकि एक प्रशासनिक पद पर रहते हुए मरीज की पीड़ा को समझकर खुद टेबल पर उतरना चिकित्सा जगत में समर्पण का बड़ा उदाहरण है।
मैं स्वयं करुंगा ऑपरेशन
महेश की हड्डी टेढ़ी जुड़ गई है, जिससे उसे काम करने में दिक्कत आ रही है। वह अपनी परेशानी लेकर आया था, उसे भर्ती कर लिया गया है। मैं स्वयं उसका ऑपरेशन करूंगा ताकि वह दोबारा स्वस्थ होकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर सके।
— डॉ. आर.के.एस. धाकड़, अधिष्ठाता, गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय
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