Welcome to KHABARO KI NIGRANI
Click to listen highlighted text!
Welcome to KHABARO KI NIGRANI
शैलेन्द्र तिवारी पत्रकार
भोपाल/ग्वालियर। मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड में हाल ही में हुए सहायक उपनिरीक्षकों के स्थानांतरण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार कई सहायक उपनिरीक्षक अपने तबादला आदेश को निरस्त कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इसके लिए विभाग से जुड़े राजनीतिक नेताओं और प्रभावशाली लोगों के जरिए जुगाड़ लगाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक मंडी बोर्ड द्वारा प्रदेश की विभिन्न मंडियों में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षकों के एक जिले से दूसरे जिले एवं एक संभाग से दूसरे संभाग में स्थानांतरण के आदेश जारी किए गए थे। लेकिन आदेश जारी होने के कई दिन बाद भी कई सहायक उपनिरीक्षकों नए पदस्थापना स्थल पर ज्वाइन करने नहीं पहुंचे हैं। कुछ मामलों में तो सहायक उपनिरीक्षकों ने अपने पुराने कार्यालय से रिलीव तक नहीं लिया है।
बताया जा रहा है कि लंबे समय से एक ही मंडी में पदस्थ रहने वाले कई सहायक उपनिरीक्षक नई जगह जाने से बचना चाहते हैं। इसके लिए वे विभाग से जुड़े राजनीतिक नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों के माध्यम से तबादला आदेश रद्द कराने की कोशिशों में लगे हुए हैं।
इधर मंडी बोर्ड के दफ्तरों में यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों में स्थानांतरण आदेश निरस्त कराने के लिए पांच से सात लाख रुपये तक के लेनदेन की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मंडी बोर्ड और प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि तबादला आदेश के बाद भी अधिकारी नए स्थान पर ज्वाइन नहीं करते और राजनीतिक दबाव के जरिए आदेश रद्द कराने का प्रयास करते हैं तो इससे शासन की स्थानांतरण नीति की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे
अब देखना होगा कि मंडी बोर्ड और प्रदेश शासन इस मामले को किस तरह से लेते हैं और क्या स्थानांतरण आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा या मेहरबानी कर मुखिया द्वारा आदेशों को निरस्त कर दिया जाएगा
Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!