Welcome to KHABARO KI NIGRANI
Click to listen highlighted text!
Welcome to KHABARO KI NIGRANI
मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्वालियर अंचल की कुंभराज मंडी से धनिया से भरी गाड़ियों को बिना शुल्क अदा किए बाहर भेजने के मामले में जहां एक ओर गाड़ियों को राजसात करने की कार्रवाई तेज़ी से की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले के जिम्मेदार माने जा रहे मंडी सचिव पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, कुछ दिन पूर्व कुंभराज मंडी से धनिया से भरी तीन गाड़ियां — MP13DP0108, MP08GA4149 और MP04GB1641 — बिना मंडी शुल्क जमा किए अन्य राज्य की ओर रवाना हो गई थीं। बताया जा रहा है कि ये गाड़ियां सागर होते हुए दूसरे राज्य में भेजी जा रही थीं। इस दौरान मंडी बोर्ड के उड़न दस्ते ने कार्रवाई करते हुए इन गाड़ियों को पकड़ लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडी बोर्ड के आयुक्त पुरुषोत्तम कुमार ने गाड़ियों को राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
हालांकि इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कुंभराज मंडी से इतनी बड़ी मात्रा में धनिया से भरी गाड़ियां बिना शुल्क जमा किए कैसे निकल गईं। मंडी नियमों के अनुसार किसी भी मंडी से फसल को बाहर भेजने से पहले संबंधित मंडी सचिव और क्षेत्र के सहायक उपनिरीक्षक द्वारा अनुमति दी जाती है। साथ ही फसल पर लगने वाले मंडी शुल्क की जांच और कागजी प्रक्रिया भी इन्हीं अधिकारियों के माध्यम से पूरी की जाती है।
ऐसे में यह स्पष्ट है कि बिना मंडी अधिकारियों की जानकारी या अनुमति के इतनी बड़ी मात्रा में फसल का बाहर जाना संभव नहीं है। सूत्रों का कहना है कि यह पूरा मामला मंडी अधिकारियों की लापरवाही या व्यापारियों से मिलीभगत का परिणाम हो सकता है। क्योंकि गाड़ियां कुंभराज से निकलकर सागर तक पहुंच गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम से अनजान बने रहे।
इस मामले में मंडी बोर्ड आयुक्त द्वारा गाड़ियों को राजसात करने की कार्रवाई तो शुरू कर दी गई है, लेकिन कुंभराज मंडी के सचिव विजय मीणा के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, मंडी से बिना शुल्क गाड़ियां निकलने की स्थिति में मंडी सचिव की जिम्मेदारी तय होती है। इसके बावजूद सचिव पर कार्रवाई नहीं होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।
व्यापारी संगठनों और मंडी से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी तो इस तरह की अनियमितताएं लगातार जारी रहेंगी। उनका कहना है कि केवल गाड़ियों को राजसात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होना चाहिए।
मंडी से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि सचिव स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाए तो भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सकती है। साथ ही इससे व्यापारियों और अधिकारियों के बीच संभावित मिलीभगत पर भी अंकुश लगेगा।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि मंडी बोर्ड की कार्रवाई एकतरफा दिखाई दे रही है। गाड़ियों को जब्त कर राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, लेकिन मंडी से गाड़ियां निकलने देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को राहत दी जा रही है। इससे विभाग की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे मामले को लेकर मंडी बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यदि मंडी सचिव विजय मीणा जैसे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती है तो प्रदेश भर में अन्य मंडियों में भी गलत संदेश जाएगा। इससे न केवल राजस्व को नुकसान होगा, बल्कि मंडी व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी।
अब देखना यह होगा कि मंडी बोर्ड आयुक्त पुरुषोत्तम कुमार इस मामले में केवल गाड़ियों तक कार्रवाई सीमित रखते हैं या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर सख्त कदम उठाते हैं। फिलहाल कुंभराज मंडी का यह मामला विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!