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मध्य प्रदेश
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नियमों की अवहेलना का बड़ा मामला — अनुशासनहीन मीणा को फिर मिला सचिव का प्रभार, कृषि विपणन बोर्ड के आयुक्त पुरुषोत्तम कुमार पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के कृषि विभाग में नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाला एक और मामला सामने आया है।

शैलेन्द्र तिवारी 8878356416

मध्य प्रदेश कृषि राज्य विपणन बोर्ड के आयुक्त पुरुषोत्तम कुमार ने अनुशासनहीन और विवादों में घिरे श्यामलाल मीणा को शिवपुरी जिले की कृषि उपज मंडी समिति, कोलारस का सचिव प्रभार  दिया गया।
इस आदेश ने पूरे संभाग के मंडी कर्मचारियों और अधिकारियों में हैरानी फैला रखी है

गुना से हटाकर कोलारस में फिर तैनाती

श्यामलाल मीणा पहले गुना जिले की कृषि उपज मंडी समिति में सचिव के पद पर पदस्थ थे।
उनके कार्यकाल में कई शिकायतें सामने आई थीं — जिनमें नियम विरुद्ध कार्यवाही, आदेशों की अवहेलना, और प्रशासनिक अनुशासनहीनता जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर आयुक्त पुरुषोत्तम कुमार ने स्वयं उन्हें सचिव पद से हटाने का आदेश जारी किया ।
लेकिन कुछ ही दिनों के बाद, साठ-गांठ और आंतरिक दबाव के चलते, वही अधिकारी  ने फिर से किसी और जिले में उसी पद पर बैठा दिया।

नियमों को ताक पर रखकर हुआ आदेश जारी

कृषि विपणन बोर्ड के सेवा नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ यदि जांच या अनुशासनिक कार्यवाही लंबित हो,
तो उसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रभार नहीं दिया जा सकता।
परंतु इस मामले में नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई।
सूत्रों का कहना है कि आदेश जारी करने से पहले ना तो विभागीय समीक्षा की गई, ना ही अनुशासन समिति से अनुमोदन लिया गया।
यह निर्णय सीधे आयुक्त कार्यालय से पारित हुआ, जिससे नियम पालन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

कर्मचारियों में असंतोष और अविश्वास का माहौल

इस नियुक्ति के बाद कृषि मंडी संगठन के भीतर कर्मचारियों में असंतोष की लहर फैल गई ।
अनेक कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब किसी अधिकारी पर जांच लंबित होती है,
तो उसे पद से हटाया जाता है,
लेकिन यहाँ उसी व्यक्ति को दोबारा जिम्मेदारी देकर ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल तोड़ा जा रहा है।
कुछ अधिकारियों ने तो यहां तक कहा है कि
“यह निर्णय यह संदेश दे रहा है कि नियम तोड़ने वालों को संरक्षण मिलेगा और ईमानदारों को सज़ा।”

संभागीय स्तर पर भी उठे सवाल

ग्वालियर-चंबल संभाग में इस आदेश को लेकर कई वरिष्ठ अधिकारी भी असहज हैं।
उनका कहना है कि अगर ऐसे विवादित निर्णय बार-बार लिए जाते रहे,
तो विभाग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर असर पड़ेगा।

*शासन से कार्रवाई की मांग*

विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला अब शासन स्तर तक पहुँच गया है।
कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर विभागीय जांच और आदेश निरस्तीकरण की मांग की है।
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को ऐसे मामलों में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए,
ताकि भविष्य में कोई अधिकारी नियमों की अवमानना करने का साहस न करे।

*जनता और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया*

स्थानीय कर्मचारियों के अलावा, कोलारस और शिवपुरी के जनप्रतिनिधियों में भी इस नियुक्ति पर चर्चा चल रही है।
लोगों का कहना है कि जब एक अधिकारी के खिलाफ शिकायतें विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज हैं,
तो उसे दोबारा संवेदनशील पद देना पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ है।
सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
*अब निगाहें शासन के रुख पर*
अब पूरा विभाग इस बात पर नज़र लगाए हुए है कि
क्या कृषि विपणन बोर्ड के इस निर्णय को शासन मंजूरी देगा या रद्द करेगा।
यदि इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई,
तो यह मामला राज्य की प्रशासनिक जवाबदेही पर एक और सवाल खड़ा करेगा।

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