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भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा जारी सहायक ग्रेड-3 पद की पदोन्नति संबंधी आदेश पर कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र जारी कर 10 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश तत्काल निरस्त करने तथा संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय ने पदोन्नति आदेश जारी करते समय सीपीसीटी (CPCT) संबंधी प्रचलित नियमों एवं विभागीय परिपत्रों की गलत व्याख्या की है। विश्वविद्यालय ने कर्मचारियों को यह शर्त रखते हुए पदोन्नति दी थी कि वे दो वर्ष के भीतर सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण कर लेंगे, जबकि विभाग के अनुसार ऐसा कोई प्रावधान लागू नहीं है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2009 में सहायक ग्रेड-3 पद के लिए हिंदी मुद्रलेखन परीक्षा के साथ मान्यता प्राप्त संस्था से कंप्यूटर डिप्लोमा अनिवार्य किया गया था। इसके बाद वर्ष 2010 में पदोन्नत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को हिंदी मुद्रलेखन परीक्षा में छूट दी गई थी। वर्ष 2013 में हिंदी मुद्रलेखन परीक्षा के स्थान पर कंप्यूटर टाइपिंग दक्षता प्रमाण-पत्र को मान्यता दी गई तथा वर्ष 2015 से सीपीसीटी स्कोर कार्ड अनिवार्य कर दिया गया।
सामान्य प्रशासन विभाग ने 26 मई 2026 को जारी स्पष्टीकरण आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि हिंदी मुद्रलेखन परीक्षा और सीपीसीटी परीक्षा अलग-अलग अर्हताएं हैं तथा सीपीसीटी परीक्षा से किसी भी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं है। इसलिए दो वर्ष के भीतर सीपीसीटी उत्तीर्ण करने की शर्त पर पदोन्नति देना नियमों के विपरीत है।
इसी आधार पर विभाग ने उच्च शिक्षा विभाग को निर्देशित किया है कि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश तत्काल निरस्त किया जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए।
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