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राजनीति

‘जांच करें और उचित कार्रवाई करें’, अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर ओम बिरला का पहला रिएक्शन

Lok Sabha Om Birla-लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष ने मंगलवार (10 फरवरी 2026) को अविश्वास प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस निचले सदन के महासचिव को सौंपा. ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि उन्हें पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष के नोटिस की जांच करें.

जांच करें और उचित कार्रवाई करें: ओम बिरला

सूत्रों के मुताबिक ओम बिरला ने महासचिव को निर्देश दिया है कि वह इस नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई करें. कांग्रेस सांसद के सुरेश, गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद ने लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह को ये अविश्वास प्रस्ताव सौंपा जिस पर 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किया था. लोकसभा की कार्यवाही के संचालन में पक्षपातपूर्ण तरीके का आरोप लगाते हुए संविधान के अनुच्छेद 94(C) के तहत प्रस्ताव पेश किया गया है.

विपक्षी सांसदों का क्या है आरोप?

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए. गौराव गोगोई ने कहा कि लोकसभा महासचिव को संविधान के अनुच्छेद 94 (C) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस सौंपा गया है. नोटिस में कहा गया, ‘हम भारत के संविधान के अनुच्छेद 94(C) के प्रावधानों के अंतर्गत लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने का नोटिस देते हैं, क्योंकि जिस तरह से वह लोकसभा की कार्यवाही का संचालन कर रहे हैं, वह खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण है. कई मौकों पर विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बोलने ही नहीं दिया गया, जबकि यह संसद में उनका मूल लोकतांत्रिक अधिकार है.’

विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता: कांग्रेस

विपक्ष ने नोटिस में कहा, ‘2 फरवरी 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया. यह कोई एक घटना नहीं है. करीब-करीब हमेशा ही ऐसा होता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता.’ विपक्ष ने दावा किया कि 3 फरवरी को हमारे आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया और उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है.

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