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मध्य प्रदेश
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आरोप पत्र जारी करने वाले आयुक्त ने ही दिया प्रभार • नियमों को दरकिनार करने की विभाग में चर्चा • पहले गुना, अब कोलारस मंडी का सचिव बनाया

दो वेतन वृद्धि रुकी फिर भी बना दिया मंडी सचिव, आयुक्त के आदेश पर उठे बड़े सवाल

शैलेन्द्र तिवारी- 8878356416 मध्यप्रदेश के कृषि उपज मंडी विभाग में नियमों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दो वेतन वृद्धि रोकने जैसी दंडात्मक कार्रवाई के बावजूद कर्मचारी श्यामलाल मीणा को बार-बार मंडी सचिव का प्रभार दिए जाने पर विभाग के अंदर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि जिन आयुक्त पुरुषोत्तम कुमार ने स्वयं मीणा के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया था, उन्हीं के द्वारा बाद में उन्हें मंडी सचिव का प्रभार भी सौंपा गया।
जानकारी के अनुसार 11 दिसंबर 2025 को आयुक्त पुरुषोत्तम कुमार द्वारा श्यामलाल मीणा के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया था। आरोप पत्र में उल्लेख किया गया कि मीणा के कार्यकाल के दौरान मंडी परिसर की व्यवस्थाओं को नजरअंदाज किया गया। मंडी परिसर में पशुओं का विचरण होता रहा और व्यापारियों के गोदामों में माल की हेराफेरी की शिकायतें भी सामने आईं। इन शिकायतों को गंभीर मानते हुए आयुक्त द्वारा मीणा की दो वेतन वृद्धि रोकने का आदेश भी किया गया था।
दंडात्मक कार्रवाई के बाद भी श्यामलाल मीणा को गुना जिले की कृषि उपज मंडी समिति में सचिव का प्रभार दे दिया गया। सूत्रों के मुताबिक गुना में पदस्थापना के दौरान भी मीणा के खिलाफ कई शिकायतें आयुक्त कार्यालय तक पहुंचीं, लेकिन उन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे विभाग में यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर इतनी शिकायतों के बावजूद मीणा पर कठोर कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे।
अब एक बार फिर आयुक्त पुरुषोत्तम कुमार ने श्यामलाल मीणा को शिवपुरी जिले की कृषि उपज मंडी समिति कोलारस का सचिव नियुक्त कर दिया है। इस आदेश के बाद मंडी विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब एक वेतन वृद्धि रुकने पर भी किसी कर्मचारी को उच्च प्रभार नहीं दिया जाता, तो दो वेतन वृद्धि रुकी होने के बावजूद मीणा को किस नियम के तहत सचिव का प्रभार दिया गया।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के कई मंडी कार्यालयों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि नियमों का समान रूप से पालन नहीं किया जाएगा तो विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर मंडी विभाग के गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में मंडी बोर्ड या राज्य शासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आता है या फिर यह मामला यूं ही चर्चाओं तक सीमित रह जाता है

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