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मध्य प्रदेश
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मीणा की मूंगफली और धनिया पर ‘मेहरबान’, पुरुषोत्तम

कार्यवाही को लचर कर कुंभराज का बनाया सचिव

मध्य प्रदेश के चंबल–ग्वालियर अंचल में मंडी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मंडी शुल्क की अनियमितताओं और कथित मिलीभगत के मामलों में अधिकारी स्तर पर कार्रवाई की बजाय मेहरबानी का दौर जारी रहने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। खास तौर पर मीणा नामक मंडी अधिकारी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मूंगफली प्रकरण से शुरू हुआ विवाद
कुछ महीने पहले जब मीणा चंबल अंचल में पदस्थ थे, उस दौरान मूंगफली से भरे ट्रकों को फ्लाइंग एस्कॉर्ट टीम ने पकड़ा था। जांच के दौरान यह सामने आया कि जिस मंडी क्षेत्र से मूंगफली का माल निकला था, वहां मंडी शुल्क जमा ही नहीं किया गया था।
बताया जाता है कि यह मूंगफली का माल करेरा जिले से अन्य जिलों में भेजा जा रहा था। दस्तावेजों की जांच के दौरान मंडी शुल्क नहीं जमा होने का मामला सामने आने के बाद तत्कालीन अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही माना था। उस समय पुरुषोत्तम ने भी मंडी शुल्क नहीं देने वाले व्यापारियों और संबंधित मंडी सचिव पर कार्रवाई की बात कही थी।
लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया। न तो बड़ी कार्रवाई हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कदम उठाया गया। उल्टा, मीणा की लापरवाही को नजरअंदाज करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किए जाने की चर्चाएं तेज हो गईं।
कुंभराज मंडी में नई पोस्टिंग, पुराने आरोप
मूंगफली प्रकरण के कुछ ही महीनों बाद मीणा को कुंभराज मंडी में सचिव जैसे जिम्मेदार पद पर पदस्थ कर दिया गया। इस नियुक्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए।
कुंभराज मंडी में पद संभालते ही मीणा पर फिर से अनियमितताओं के आरोप लगने लगे। आरोप है कि मीणा ने कुछ व्यापारियों से मिलीभगत कर धनिया से भरी गाड़ियों को बिना मंडी शुल्क के बाहर भेजना शुरू कर दिया।
बताया जाता है कि कुंभराज मंडी से बड़ी संख्या में धनिया से भरे वाहन अन्य जिलों में रवाना किए जाने लगे, लेकिन मंडी शुल्क जमा नहीं किया गया। इससे मंडी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
सागर फ्लाइंग टीम ने पकड़े ट्रक
कुछ दिन पहले सागर फ्लाइंग टीम ने कुंभराज से निकलने वाले धनिया से भरे तीन ट्रकों को पकड़ा। जिनके नंबर बताए जा रहे हैं:
MP13DP0108
MP08GA4149
MP04GB1641
जांच में इन वाहनों के दस्तावेजों में भी अनियमितताओं की बात सामने आई। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि मीणा पर इस बार कड़ी कार्रवाई होगी, लेकिन आरोप है कि यहां भी मामला ठंडा कर दिया गया।
कार्रवाई की बजाय मेहरबानी?
लगातार दो मामलों में नाम सामने आने के बावजूद मीणा पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि मंडी शुल्क की अनियमितता से शासन को लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि पहले मूंगफली प्रकरण और अब धनिया मामले में कार्रवाई नहीं होना अधिकारियों की कार्यशैली पर संदेह पैदा करता है।
मंडी राजस्व को नुकसान का अंदेशा
मंडी शुल्क राज्य सरकार के लिए राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत होता है। यदि बड़ी मात्रा में कृषि उपज बिना शुल्क के बाहर भेजी जाती है, तो इससे सरकारी आय पर सीधा असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की अनियमितताओं पर रोक नहीं लगी, तो मंडी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी असर पड़ सकता है।
जिम्मेदारी तय कब होगी?
अब सवाल यह उठ रहा है कि लगातार दो मामलों में नाम सामने आने के बावजूद मीणा पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या मंडी प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगा?
वहीं पुरुषोत्तम द्वारा पहले कार्रवाई के संकेत देने के बाद भी परिणाम सामने नहीं आने से प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना होगा कि मंडी बोर्ड और संबंधित अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा

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