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मध्य प्रदेश में फसल सीजन शुरू होते ही किसान अपनी मेहनत से उगाई गई उपज को बेचने के लिए कृषि उपज मंडियों में पहुंच रहे हैं। सरकार द्वारा किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले, इसके लिए कृषि उपज मंडी समितियों में सचिवों की जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि तौल प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसानों के साथ किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
प्रदेश की कई मंडियों में सचिवों की निगरानी में नियमों के तहत कांटों पर तुलाई की जा रही है और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य भी मिल रहा है। लेकिन भिंड जिले की कृषि उपज मंडी समिति में स्थिति इसके विपरीत बताई जा रही है। यहां व्यापारियों द्वारा किसानों की फसल तौलते समय 650 ग्राम से लेकर 700 ग्राम तक की कटौती किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
आरोप है कि मंडी में व्यापार कर रहे कुछ व्यापारी तौल के दौरान किसानों की उपज में कटौती कर रहे हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस पूरे मामले में मंडी सचिव राजेश रिझोरिया पर भी मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। किसानों ने बताया है कि शिकायत के बावजूद भी मंडी प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
किसानों का आरोप है कि तौल के दौरान होने वाली इस कटौती से हर क्विंटल पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। बड़ी मात्रा में फसल बेचने वाले किसानों को हजारों रुपये तक का नुकसान हो रहा है, जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री द्वारा किसानों के हित में सख्त नियम बनाए गए हैं, लेकिन भिंड मंडी में इन नियमों की अनदेखी होने से मंडी सचिव की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों की जेब पर डांका डलता रहेगा
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