
Who is Saurav Das: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके के अलावा आशुतोष रांका और सौरभ दास भी आंदोलन का बड़ा चेहरा हैं.
संसद मार्च प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच बातचीत हुई है. कॉकरोच जनता पार्टी के सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की. अपने एक्स पोस्ट के जरिए सौरभ दास ने इसकी जानकारी दी. सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके के अलावा ये दोनों चेहरे भी चर्चा में हैं. मीडिया में सीजेपी के बारे में ये पक्ष रखते हैं और आंदोलन के बारे में जानकारी देते रहे हैं.
सौरव दास कौन हैं?
सौरव दास एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट हैं, जो लॉ, गवर्नमेंट, ज्यूडिशरी जैसे विषयों पर खास ध्यान देते हैं. पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक करने के बाद, उन्होंने 2020 में अपने पेशेवर लेखन करियर की शुरुआत की. वह कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता हैं. सौरभ दास का संबंध दिल्ली से है.
आईआईटी कानपुर से पढ़े आशुतोष रांका
आशुतोष रांका, कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. वह आईआईटी कानपुर से पढ़े हुए हैं. लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स से पढ़ें रांका बीते कुछ महीनों से सीजेपी से जुड़ने के बाद चर्चा में हैं. रांका जयपुर के रहने वाले हैं.
आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज
बता दें कि संसद मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. विरोध प्रदर्शन तेज होने की वजह से मध्य दिल्ली के बड़े हिस्से में यातायात ठप हो गया.
अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया?
सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. बाद में उन्होंने एक्स पर ही कहा कि दीपके न तो हिरासत में हैं और न ही गिरफ्तार किए गए हैं.
कुछ पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल
स्कूल की वर्दी पहने कुछ प्रदर्शनकारियों समेत अन्य लोगों के मध्य दिल्ली में प्रवेश करने, अंदरूनी सड़कों से निकलने और संसद के जितना संभव हो सके, करीब पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने की कोशिश के दौरान झड़पें हुईं. इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए. व्यापक बैरिकेडिंग के बावजूद वे नहीं रुके. वे कई किलोमीटर पैदल चले, बीच-बीच में प्रदर्शनकारियों के समूहों में शामिल होकर नारे लगाए, उचित अवसर की प्रतीक्षा में रुकते रहे ताकि बैरिकेड तोड़ सकें, और कई स्थानों पर बैरिकेड के कई स्तरों को पार करने में सफल रहे.
पूरी तरह से ठीक महसूस कर रहा हूं- वांगचुक
कुछ किलोमीटर दूर, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने चिकित्सा अधीक्षक से अनुरोध किया कि उन्हें ‘भले ही अस्थायी रूप से’ अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वे सीजेपी के संसद मार्च में भाग ले सकें. उन्होंने कहा कि वे ‘‘पूरी तरह ठीक’’ महसूस कर रहे हैं और उनके सभी स्वास्थ्य संबंधी मानक सामान्य हैं.
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, पटेल चौक, शास्त्री भवन, आरबीआई बिल्डिंग और संसद मार्ग थाने के पास सुरक्षाबलों द्वारा अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज किया गया और आंसू गैस को गोले छोड़े गए.
लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित
संसद के मानसून सत्र का सोमवार को पहला दिन भी था. जंतर-मंतर से शुरू हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी.
प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. नई दिल्ली जिले में अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पड़ोसी जिलों से पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ सुरक्षा दोगुनी कर दी गई.
मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए गए
अधिकारियों ने बताया कि स्थिति के बिगड़ने पर रिजर्व में रखे गए अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियां को भी तैनात किया गया. एहतियात के तौर पर मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए जाने के बाद कई यात्री अंदर ही फंस गए.
राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए दर्जनों प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय राजधानी में कई स्थानों पर एकत्र हुए और उन्होंने ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाए. इससे पहले दिन में, पुलिस ने मार्च को उस समय रोक दिया जब जुलूस कनॉट प्लेस इलाके में पहुंचा और संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया.
प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं में बिखर गए, और कई लोग धुएं से बचने के लिए सड़कों पर भागने लगे. भारी सुरक्षा तैनाती के बीच, छोटे समूह नजदीकी चौराहों पर फिर से एकत्र हुए और नारेबाजी जारी रखी, जबकि पुलिस ने मार्च को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए हुए थे.
प्रदर्शन में भाग लेने वालों ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वह केवल प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली आया है. उसने शिक्षा को देश के विकास की नींव बताया और आरोप लगाया कि अगर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो व्यवस्था खराब हो जाएगी. उसने कहा, ‘‘हम यहां केवल जवाबदेही की मांग करने और यह सुनिश्चित करने आए हैं कि छात्रों को वह शिक्षा मिले जिसके वे हकदार हैं.’’ सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे बिहार के व्यक्ति ने कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी आवाज उठाने और अधिकारियों से जवाब मांगने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र हुए थे. उसने कहा कि कई युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों बिताए हैं और वे पारदर्शिता तथा जवाबदेही के हकदार हैं.





