Welcome to KHABARO KI NIGRANI
Click to listen highlighted text!
Welcome to KHABARO KI NIGRANI
शैलेन्द्र तिवारी
ग्वालियर। तानसेन की नगरी के नाम से देश-विदेश में प्रसिद्ध ग्वालियर अब एक और नई पहचान बना रहा है। यहां के सिरोल थाना क्षेत्र में रहने वाले राजवीर नाम के युवक ने गेंदें के पेड़ की पत्तियों को बेचकर शहर का नाम रोशन किया है। उनकी यह पहल न केवल अनोखी है, बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों के लिए प्रेरणा का कारण भी बन गई है।
ग्वालियर वैसे तो अपने ऐतिहासिक किलों, तानसेन के संगीत और पुरातत्व की स्मृतियों के लिए जाना जाता है, लेकिन अब इस शहर का एक युवा पर्यावरण और व्यवसाय के नए मेल का उदाहरण पेश कर रहा है। राजवीर ने गेंदें (गेंदे) के पेड़ की पत्तियों से ऐसा कारोबार खड़ा किया है, जिसमें न कोई बड़ा खर्च है, न दिखावा—सिर्फ मेहनत और नवाचार है।
आम तौर पर पेड़-पौधों को बेचने के लिए माली को बाजार और घर-घर जाना पड़ता है। लोग मोलभाव करते हैं, दाम घटाने की बात करते हैं। लेकिन राजवीर के साथ इसका उल्टा है। उनकी बेची गई गेंदें की पत्तियों को खरीदने के लिए लोग खुद उनके घर पहुंचते हैं। खरीदार ग्वालियर के कोने-कोने से आते हैं और बिना किसी मोलभाव के 100 से 200 रुपए देकर पत्तियां खरीदकर ले जाते हैं।
लोग बताते हैं कि इन पत्तियों से “बंसी” जलाने पर उन्हें एक अलग तरह की खुशबू और जन्नत जैसा एहसास होता है। राजवीर का कहना है कि शुरुआत में लोग हंसते थे, लेकिन अब वही लोग उनकी तारीफ करते नहीं थकते। उनकी पत्तियां अब कई मोहल्लों और बाजारों में मशहूर हो चुकी हैं।
राजवीर का यह काम न केवल एक छोटे स्तर का व्यवसाय है, बल्कि यह दिखाता है कि अगर सोच सकारात्मक हो और मेहनत ईमानदार, तो साधारण चीज़ें भी शहर की पहचान बन सकती हैं। डी बी सिटी रोड का यह युवा आज ग्वालियर की शान बन चुका है।
Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!