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गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के न्यू एकेडमिक ब्लॉक में शनिवार को कम्युनिटी मेडिसिन विभाग (पीएसएम) द्वारा रैबीज फ्री इंडिया विषय पर सीएमई (सतत चिकित्सा शिक्षा) का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को रैबीज की रोकथाम, उपचार और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरकेएस धाकड़ रहे, जबकि संरक्षक के रूप में जेएएच समूह के अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना उपस्थित थे। विशेष अतिथि के रूप में बीएसएफ सिविल अस्पताल टेकनपुर से डॉ. तृप्तल कौर तथा नगर निगम के एनिमल बर्थ कंट्रोल के सहायक नोडल अधिकारी गौरव परिहार मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9.30 बजे अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. आरकेएस धाकड़ ने कहा कि रैबीज का लगातार सामने आना चिंता का विषय है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि छह वर्ष का एक बच्चा, जिसे टीका भी लग चुका था, हमारे सामने दम तोड़ देता है, ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि रैबीज के मामलों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज बंसल ने पीपीटी के जरिए समाज पर रैबीज के बोझ और बीमारी की भयावहता की जानकारी दी। वहीं, डॉ. राहुल ने वीडियो डिमॉन्स्ट्रेशन के माध्यम से बताया कि कुत्ता काटने पर घाव को कैसे धोना चाहिए और इंजेक्शन लगाने की सही तकनीक क्या है।
*विशेषज्ञों ने इन बिंदुओं पर डाला प्रकाश:*
एनिमल बाइट मैनेजमेंट : डॉ. अवधेश दिवाकर ने बताया कि जानवर के काटने पर तत्काल प्राथमिक उपचार कैसे करें।
प्रोटोकॉल और रिपोर्टिंग : डॉ. रामनिवास माहौर ने रैबीज रिपोर्टिंग और प्रोटोकॉल में देरी होने पर बरती जाने वाली सावधानियों पर जानकारी दी।
एनिमल बर्थ कंट्रोल : नगर निगम के सहायक नोडल अधिकारी गौरव परिहार ने नसबंदी अभियान में आने वाली बाधाओं और भविष्य की कार्ययोजना साझा की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. विथीका दुदावत और डॉ. वागीशा तिवारी ने किया। इस दौरान डॉ. राजेश यादव, डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव, डॉ. निधीश, डॉ. अजीत राजपूत, डॉ. संजीव सिंह, डॉ. केपी रंजन, डॉ. शक्ति सिंघल तथा जूडा अध्यक्ष डॉ. धुआराम गुर्जर सहित विभाग के पीजी रेजिडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित डॉ.सुस्मिता मुंगी ने किया।
*प्री और पोस्ट टेस्ट से परखी गई जानकारी*
सीएमई के शुरुआत में प्रतिभागियों का 30 प्रश्नों का प्री-टेस्ट लिया गया, जबकि कार्यक्रम के अंत में पोस्ट-टेस्ट आयोजित किया गया। इसके माध्यम से प्रतिभागियों की पहले की जानकारी और प्रशिक्षण के बाद हुई सीख का आकलन किया गया।
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