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कर्मचारी गायब, वेतन जारी… किसकी अनुमति से चल रही ये व्यवस्था?

बमौर कृषि उपज मंडी समिति कार्यालय में "घर बैठे नौकरी" का खेल

शैलेन्द्र तिवारी पत्रकार

मुरैना जिले की बामोर तहसील स्थित कृषि उपज मंडी समिति कार्यालय में कर्मचारियों की लापरवाही और गैरहाजिरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि मंडी समिति के कई कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय नहीं पहुंच रहे, इसके बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज हो रही है और उन्हें शासन से पूरा वेतन भी मिल रहा है। इससे सरकारी कार्य प्रभावित हो रहे हैं और किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि कृषि उपज मंडी समिति बामोर में पच्चीस मार्च को सहायक उपनिरीक्षक रवि शाक्य  उपस्थित मिला  पदस्थ कुछ कर्मचारी लंबे समय से विनोद श्रीवास्तव अर्चना शर्मा अन्नू भदौरिया स्वाति परिहार शाहरूख खान कार्यालय में अनुपस्थित थे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी घर बैठे ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जबकि मंडी कार्यालय में आवश्यक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसानों और व्यापारियों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
किसानों को उठानी पड़ रही परेशानी

मंडी में आने वाले किसानों का कहना है कि जब वे अपनी उपज के पंजीयन, भुगतान, नीलामी या अन्य कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचते हैं तो संबंधित कर्मचारी उपलब्ध नहीं रहते। कई बार किसानों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
स्थानीय व्यापारियों ने भी आरोप लगाया है कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण मंडी का प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। इससे मंडी व्यवस्था चरमरा रही है और किसानों-व्यापारियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
बिना उपस्थिति कैसे जारी हो रहा वेतन?

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब कर्मचारी कार्यालय नहीं पहुंच रहे, तो उनकी उपस्थिति कौन दर्ज कर रहा है और किसकी अनुमति से उन्हें वेतन जारी किया जा रहा है। यह भी चर्चा है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
सरकारी नियमों के अनुसार, कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और कार्य निष्पादन के आधार पर ही वेतन जारी किया जाता है। इसके बावजूद यदि कर्मचारी अनुपस्थित रहकर भी वेतन ले रहे हैं, तो यह शासन के नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।

जांच की उठी मांग

 यदि कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय नहीं पहुंच रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
शासन को लग रहा आर्थिक नुकसान
कर्मचारियों के बिना काम किए वेतन लेने से सरकार के खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है। ऐसे में यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो मंडी की व्यवस्था और प्रभावित हो सकती है।
प्रशासन की चुप्पी

इस मामले में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितना गंभीरता से लेकर जांच कराता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

अब सवाल यही है —

क्या “घर बैठे नौकरी” करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या मामला यूं ही दब जाएगा?

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