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ग्वालियर। मध्यप्रदेश में बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ग्वालियर अंचल सहित प्रदेश के कई जिलों में बूंदाबांदी के साथ हुई ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। अचानक बदले मौसम से गेहूं, सरसों और चना की तैयार फसल खेतों में बिछ गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार ओलावृष्टि का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्वालियर अंचल की कृषि उपज मंडियों की आय पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। यदि फसल उत्पादन घटता है तो मंडियों में आवक कम होगी, जिससे मंडी शुल्क और अन्य राजस्व में गिरावट आने की संभावना है।
खेतों में बिछी फसल, किसानों की बढ़ी चिंता
ग्वालियर अंचल के ग्वालियर, शिवपुरी, अशोकनगर, भिंड, मुरैना और दतिया सहित कई इलाकों में ओलावृष्टि की खबरें सामने आई हैं। किसानों के अनुसार, गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन ओले गिरने से फसल खेतों में गिर गई है। इससे दाने पतले पड़ गए हैं और गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है।
किसानों का कहना है कि इस समय हुई ओलावृष्टि सबसे ज्यादा नुकसानदायक होती है, क्योंकि फसल कटाई के अंतिम चरण में होती है। ऐसे में उत्पादन कम होने के साथ-साथ बाजार में भी कम कीमत मिलने की आशंका बढ़ जाती है।
प्रशासन ने शुरू कराया सर्वे
कई जिलों में किसानों के नुकसान को देखते हुए कलेक्टरों ने राजस्व अधिकारियों को सर्वे के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार और पटवारी मौके पर पहुंचकर खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में पटवारियों द्वारा फोन के माध्यम से भी प्राथमिक जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि प्रभावित किसानों को राहत दी जा सके। हालांकि, किसानों को मुआवजे का इंतजार रहेगा, क्योंकि पूर्व में भी कई मामलों में राहत राशि मिलने में देरी होती रही है।
मंडियों की आय पर भी पड़ेगा असर
ओलावृष्टि के कारण यदि फसल उत्पादन घटता है तो इसका असर सीधे मंडियों की आवक पर पड़ेगा। ग्वालियर अंचल की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में गेहूं और सरसों की बड़ी मात्रा में आवक होती है। लेकिन इस बार नुकसान के चलते आवक कम रहने की संभावना जताई जा रही है।
मंडी विशेषज्ञों का कहना है कि आवक कम होने से मंडी शुल्क, हम्माली और अन्य शुल्कों से मिलने वाली आय में गिरावट आएगी। इससे मंडियों के विकास कार्यों और संचालन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों ने मांगी राहत
ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों ने शासन से शीघ्र सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि पहले ही बढ़ती लागत और मौसम की मार से वे परेशान हैं, ऐसे में फसल खराब होने से आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी मौसम में उतार-चढ़ाव की संभावना जताई है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि कटाई का समय चल रहा है और मौसम का हर बदलाव नुकसान बढ़ा सकता है।
दोहरी मार झेलेंगे किसान और मंडियां
ग्वालियर अंचल में हुई ओलावृष्टि ने किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। वहीं, उत्पादन घटने से मंडियों की आय पर भी असर पड़ने की संभावना है। ऐसे में यह मौसम किसानों और मंडी प्रशासन दोनों के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
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