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ग्वालियर में शनिवार शाम अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी-तूफान के साथ ओलावृष्टि और बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। शाम करीब 4 बजे काली घनी घटाओं के साथ शुरू हुई बारिश के दौरान आंवले और बेर के आकार के ओले गिरे, जिससे शहर की सड़कों पर सफेदी छा गई और छत-छज्जे ओलों से पट गए।
ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल ओलों का भार नहीं सह सकी और झुक गई। बारिश और नमी के कारण गेहूं की बालियां भीग गईं, जिससे दानों के काले पड़ने और चमक फीकी होने लगी है। इससे बाजार में गेहूं की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। अचानक हुए इस बदलाव से किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई है।
तेज ओलावृष्टि से कई वाहनों के कांच टूट गए, वहीं तेज आंधी के कारण शहर के कई स्थानों पर टीन शेड उड़ गए और होर्डिंग भी क्षतिग्रस्त हो गए। शाम 4 बजे के बाद शुरू हुई ओलावृष्टि करीब 7 बजे फिर दोबारा हुई, जिससे नुकसान और बढ़ गया।
मौसम विभाग के अनुसार जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में यह बदलाव आया है। विभाग ने पहले ही तेज बारिश, आंधी और ओले गिरने को लेकर येलो अलर्ट जारी किया था। शनिवार को अधिकतम तापमान गिरकर 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस रहा।
मौसम विभाग ने 7 अप्रैल तक मौसम में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार नमी और बारिश जारी रही तो गेहूं की फसल को और नुकसान हो सकता है।
हालांकि मौसम में आए बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन किसानों के लिए यह राहत चिंता में बदल गई है।
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