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ग्वालियर संभाग की मंडियों में मंडी बोर्ड की कार्यवाही को लेकर कर्मचारियों के बीच दोहरी नीति की चर्चा तेज हो गई है। बोर्ड के एप पर बिना चेक किए व्यापारियों की गाड़ियों को रोककर व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। ऐसा व्यापारियों ने बताया जिले स्तर पर बनाए गए उड़नदस्ता प्रभारियों द्वारा बिना शुल्क चुकाए जाने वाली गाड़ियों पर कार्यवाही के अलग-अलग तरीके अपनाए जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
मंडी बोर्ड द्वारा स्पष्ट नियम बनाए गए हैं कि बिना मंडी शुल्क चुकाए परिवहन की जा रही कृषि उपज से भरी गाड़ियों को पकड़े जाने पर राजसात की कार्रवाई की जाएगी, ताकि व्यापारियों को नियमों का पालन करने के लिए बाध्य किया जा सके और मंडियों की आय बढ़ाई जा सके। हाल के महीनों में आयुक्त स्तर से कई मामलों में सख्त कार्रवाई भी की गई है।
कुछ दिन पहले श्योपुर के पास गेहूं और धान से भरी गाड़ियों को उड़नदस्ता टीम ने पकड़ा था, और कोलारस से मूंगफली की बिना शुल्क चुकाए जाने वाली गाड़ियों पर आयुक्त द्वारा राजसात की कार्रवाई की गई। इसी तरह कुंभराज क्षेत्र से बिना शुल्क चुकाए जा रही गाड़ियों को सागर उड़नदस्ता टीम ने पकड़ा था और इन पर भी आयुक्त स्तर से राजसात की कार्रवाई हुई।
लेकिन इसके विपरीत ग्वालियर संभागीय संचालक द्वारा गठित उड़नदस्ता टीम ने पनिहार के पास मक्के से भरी एक गाड़ी को पकड़ा और उसे लश्कर कृषि उपज मंडी में खड़ा कर दिया। बाद में जब इस गाड़ी के संबंध में जानकारी ली गई तो उड़नदस्ता टीम द्वारा बताया गया कि गाड़ी को पांच गुना शुल्क लेकर छोड़ना एवं अनुज्ञा का गलत होना बताया गया यह बात उड़नदस्ते के द्वारा बताई गई।
यही मामला अब ग्वालियर संभाग की मंडियों में चर्चा का विषय बन गया है। कर्मचारियों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब आयुक्त द्वारा स्पष्ट निर्देश हैं कि बिना शुल्क वाली गाड़ियों को राजसात किया जाए, तो फिर इस गाड़ी को पांच गुना शुल्क लेकर क्यों छोड़ा गया।
इस मामले में कर्मचारियों के बीच राजनीतिक दबाव या लेनदेन की संभावना को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इस पूरे मामले पर संयुक्त संचालक चुप्पी साधे हुए ।इस मामले की जानकारी के लिए मंडी बोर्ड के संचालक दया किशन को फोन लगाया तो उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया। उड़नदस्ता टीम की इस कार्यवाही ने ग्वालियर संभाग में पारदर्शिता और नियमों पर सवाल खड़े कर दिए है।
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