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परिवहन विभाग में दोहरी कार्यवाही से बढ़ा असंतोष,

अपनों पर रहम-गैरों पर सितम’ के आरोप

शैलेन्द्र तिवारी पत्रकार
मो.8878356416

ग्वालियर/ मध्यप्रदेश परिवहन विभाग में हाल ही में हुई दो अलग-अलग कार्यवाहियों बाद विभागीय कर्मचारियों में असंतोष का माहौल बन गया । एक ओर जबलपुर में पदस्थ परिवहन आरक्षक श्वेता अहिरवार को लोकायुक्त द्वारा दर्ज प्रकरण के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर राजगढ़ जिले के खिलचीपुर चेकपोस्ट पर कथित लेनदेन का वीडियो वायरल होने के बाद दो परिवहन आरक्षकों को केवल कार्यस्थल से हटाकर ग्वालियर कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। इस दोहरी कार्रवाई को लेकर कर्मचारियों के बीच “अपनों पर रहम-गैरों पर सितम” की चर्चा तेज हो गई है।
जारी आदेश के अनुसार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय जबलपुर में पदस्थ परिवहन आरक्षक श्वेता अहिरवार के खिलाफ जिला लोकायुक्त संगठन जबलपुर द्वारा अपराध क्रमांक 44/26 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(1) और 13(2) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया। मामले को गंभीर मानते हुए परिवहन आयुक्त ने 9 अप्रैल 2026 को उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें परिवहन आयुक्त कार्यालय ग्वालियर से संबद्ध किया गया है तथा मामले की प्रारंभिक जांच उप परिवहन आयुक्त (शिकायत) को सौंपी गई है।
वहीं दूसरी ओर 14 अप्रैल 2026 को राजगढ़ जिले के खिलचीपुर चेकपोस्ट पर भास्कर टीम द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में परिवहन आरक्षक आर.पी. सिंह हनोतिया और अमित झरखे ट्रकों की आवाजाही के लिए पैसों के लेनदेन को लेकर बातचीत करते दिखाई दिए। इस मामले में 16 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से उनके कार्यस्थल से हटाकर परिवहन आयुक्त कार्यालय ग्वालियर से अस्थायी रूप से संबद्ध कर दिया गया, लेकिन निलंबन की कार्रवाई नहीं की गई।
इसी को लेकर विभागीय कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि एक मामले में लोकायुक्त प्रकरण दर्ज होने पर तत्काल निलंबन कर दिया गया, जबकि दूसरे मामले में वीडियो साक्ष्य सामने आने के बावजूद केवल संबद्ध करने की कार्रवाई की गई। इससे विभाग में दोहरी नीति अपनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि यदि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की जा रही है तो सभी मामलों में समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। अलग-अलग प्रकार की कार्रवाई से कर्मचारियों में असमंजस और असंतोष का माहौल बन रहा है।
हालांकि परिवहन विभाग की ओर से दोनों मामलों में जांच जारी होने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल परिवहन विभाग में इन दो कार्रवाइयों के बाद हलचल तेज हो गई है और कर्मचारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

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