मीणा पर आरोप है कि वह गरीबों और जरूरतमंदों का हक छीनकर मंडी कार्यालय में नौकरी कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस पद को लेकर कई योग्य बेरोजगार युवाओं ने आवेदन किया गया होगा, लेकिन मीणा ने अपने प्रभाव और राजनीतिक पहुंच का उपयोग कर पद पर कब्जा बनाए रखा होगा
सूत्रों के अनुसार, मीणा के खिलाफ पूर्व में भी कई बार शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। स्थानीय नागरिकों ने आयुक्त कार्यालय तक शिकायतें पहुंचाईं, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। आयुक्त स्तर पर हो रही कार्यवाही ने इस चुप्पी ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर शासन ऐसे मामलों में आंखें क्यों मूंदे हुए है।
मीणा न केवल अपनी पदस्थापना का दुरुपयोग कर रहा है, बल्कि गरीब किसानों से जुड़े कई कार्यों में भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। मंडी के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि पारदर्शिता के नाम पर सिर्फ कागजी कार्यवाही की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
अब जागरूक नागरिकों ने गुना जिला प्रशासन से मांग की है कि मीणा की नियुक्ति और कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इस तरह के भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों और बेरोजगारों का हक सुरक्षित रह सके।
जांच नहीं होने पर सवाल
फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरी और लाभ उठाने वाला मीणा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मीणा के मामले की जांच तहसील स्तर से की जाए — तो कई बड़े खुलासे हो सकते है
जांच तहसील स्तर से शुरू हो,
ऐसे लोगों के नाम सामने आएंगे जिन्होंने झूठे दस्तावेज़ों के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनवाया गया
कई बार ये फर्जी सर्टिफिकेट नौकरी, प्रमोशन या छात्रवृत्ति हासिल करने में इस्तेमाल किए जाते हैं
जिससे असली हकदार वंचित रह जाते हैं।
तहसील से जांच शुरू होने पर पुराने रिकॉर्ड, आवेदन पत्र और गवाहों के बयान सामने आएंगे,
और यह साफ होगा कि फर्जी प्रमाण पत्र कैसे और किसकी मदद से बना




