Welcome to KHABARO KI NIGRANI   Click to listen highlighted text! Welcome to KHABARO KI NIGRANI
मध्य प्रदेशलोकल न्यूज़
Trending

दया किशन के निरीक्षण बन रहे औपचारिकता, जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस

गोहद मंडी में घूमते पशु खा रहे किसानों की फसल

गोहद।
मध्य प्रदेश सरकार मंडियों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ग्वालियर अंचल की मंडियों में व्यवस्थाओं को लेकर संयुक्त संचालक दयाकिशन लगातार निरीक्षण तो कर रहा है, लेकिन निरीक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ति किए जाने के चर्चा अंचल की मंडियों में चल रही है।
ताजा मामला गोहद मंडी का सामने आया है, जहां मंडी परिसर में अव्यवस्था का आलम साफ दिखाई दिया। मंडी परिसर के अंदर किसान अपनी उपज लेकर खड़े रहे, वहीं व्यापारी हम्मालों के जरिए तौल कार्य करवा रहे थे। इसी दौरान मंडी परिसर में खुलेआम घूम रहे मवेशी किसानों की उपज को नुकसान पहुंचाते नजर आए।
मंडी परिसर में घूमते सांड और अन्य पशु किसानों की ट्रॉलियों में रखे गेहूं और अन्य फसलों को खाते दिखाई दिए। किसान अपनी मेहनत की फसल को बचाने के लिए परेशान होते रहे, लेकिन मंडी प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई। पशुओं के कारण किसानों की उपज को लगातार नुकसान हो रहा है, जिससे किसानों में नाराजगी दिखाई दे रही है।
किसानों ने बताया कि मंडी परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी मंडी सचिव की है, लेकिन यहां कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। मंडी परिसर में पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए न तो पर्याप्त गेट पर व्यवस्था है और न ही सुरक्षा कर्मियों की तैनाती दिखाई देती है।
गौरतलब है कि संयुक्त संचालक दयाकिशन द्वारा ग्वालियर अंचल की मंडियों का निरीक्षण लगातार किया जा रहा है, लेकिन निरीक्षण के बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं कर पाने में असफल दिखाई दे रहा है। इससे निरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं ग्वालियर अंचल की मंडियों के किसानों का कहना दयाकिशन का निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है और जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
मंडी परिसर में अव्यवस्था, पशुओं की आवाजाही और किसानों को हो रहे नुकसान के बावजूद मंडी प्रशासन की उदासीनता किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करता है या फिर किसानों को इसी तरह नुकसान झेलना पड़ेगा। ओर मवेशियों को भगाने के लिए फसल बेचने आने वाले किसानों को ही आगे आना पड़ेगा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!